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Friday, 14 March 2014

अगीत की शिक्षाशाला.....कार्यशाला १९ .. अगीत छंद व उनका रचना विधान.....त्रिपदा अगीत छंद ...

अगीत की शिक्षाशाला.....कार्यशाला १९.... अगीत छंद व उनका रचना विधान.....त्रिपदा अगीत

छंद ...

 

            अगीत की शिक्षाशाला.... अगीत में रस छंद अलंकार योजना---क्रमश ... अगीत- छंद....      

                                              
               (   लय व गति  काव्य-विधा के अपरिहार्य तत्व व विशेषताएं हैं जो इसे गद्य-विधा से पृथक करती  
 है  |  यति --काव्य को संगीतमयता के आरोह-अवरोह के साथ कथ्य व भाव को अगले स्तर पर परिवर्तन की  
स्पष्टता से विषय सम्प्रेषण को आगे बढाती है |  तुकांत बद्धता ..काव्य के शिल्प सौंदर्य को बढाती है परन्तु  

संक्षिप्तता, शीघ्र भाव-सम्प्रेषणता व अर्थ-प्रतीति का ह्रास करती है | अतः वैदिक छंदों व ऋचाओं की अनुरूपता  
व तादाम्य लेते हुए अगीत मूलतः अतुकांत छंद है | हाँ लय व गति इसके अनिवार्य तत्व हैं तथा तुकांत, यति,  
मात्रा व गेयता का बंधन नहीं है | अगीत वस्तुतः अतुकांत गीत है |

                      अगीत कविता का मुख्य अभिप्राय: है राष्ट्र, समाज व जमीन से जुडी वह छोटी अतुकांत कविता जो पांच से दस पंक्तियों से कम या अधिक की न हो |  जिसमें लय व गति हो, गेयता का बंधन न हो एवं मात्रा- बंधन भी आवश्यक नहीं |  वर्तमान में अगीत काव्य-विधा में प्रचलित व प्रयोग होरहे विविध छंदों का नीचे वर्णन किया जा रहा है | वे छंद ये हैं-----
१- अगीत छंद ......२-लयबद्ध अगीत  ३-गतिमय सप्तपदी अगीत  ४-लयबद्ध षटपदी अगीत   ५-नव-अगीत ६-त्रिपदा अगीत   ७-त्रिपदा अगीत गज़ल ... )
                   कार्यशाला -१९ ...त्रिपदा  अगीत छंद....  .इस छंद का रचना विधान निम्न है.....
 
त्रिपदा अगीत .... इस छंद का रचना विधान यह है ----
१.अतुकांत छंद
२.तीन पंक्तियों से कम व अधिक नहीं
३.गतिबद्ध परन्तु गेयता का बंधन नहीं
४. सोलह-सोलह निश्चित मात्राओं की तीनों पंक्तियाँ |

यथा----

"श्वेत धवल दाडी लहराती,
भाल  विशाल, उच्च आभामय ;
सच्चे निस्पृह युग-ऋषि थे वे |"                      ---- वचनेश त्रिपाठी के प्रति ( डा श्याम गुप्त )

"  प्यार बना ही रहे हमेशा , 
ऐसा सदा नहीं क्यों होता ;
सुन्दर नहीं नसीब सभी  का |"                       ----- सुषमा गुप्ता  


" नैन नैन मिल गए सुन्दरी,
 
नैना  लिए झुके भला क्यों ;
 
मिलते क्या बस झुक जाने को |"                      ... डा श्याम गुप्त


" पायल छनका कर दूर हुए,
 
हम कुछ ऐसे मज़बूर हुए ;
 
उस नाद-ब्रह्म मद चूर हुए |"                   

  ..... डा श्याम गुप्त


" आँख मूद कर हुक्म बजाना,
 
सच  की बात न मुंह पर लाना ;
 
पड जाएगा कष्ट उठाना | "                          ---- डा श्याम गुप्त